2 मिनट पहले जो हसती, खेलती जीवन जी रही थी, 1 घंटे बाद उसकी पहचान मिट चुकी होती है। वो भी सिर्फ सौ रूपये के एसिड की वजह से। मतलब किसी के खूबसूरत जिंदगी की कीमत सिर्फ सौ रूपये ? तेजाब /एसिड — ये सिर्फ एक केमिकल नहीं है। ये उस महिला या स्त्री के चेहरे, सपनों, पहचान और जीने की इच्छा पर किया गया सबसे घातक हमला है। और सबसे खास बात - हमलावर और कोई नहीं बल्कि 'कोई पुरुष या कोई लड़का होता है। हमलावर अक्सर बच निकलता है, पकड़ा भी जाए तो भी समाज में जी तो सकता है लेकिन पीड़िता ज़िंदगी भर जलती है, जिंदगी भर हर दिन अपनी दर्दनाक मौत मरती है ? दर्जनों सर्जरी का दर्द और अनगिनत रातों में मर जाने की ख्वाहिश लेकर जीती रहती है ?
यदि आप इस ब्लॉग पोस्ट को सिर्फ एक कहानी के तौर पर पढ़ रहे है तो आप स्किप कर के चले जाईये। अगर आप किसी के दर्द को अपना समझ कर महसूस करना चाहते है तो फिर इसे अंत तक पढ़िए, क्योंकि हमें आपके जैसे ही संवेदनशील और मानवता से भरे हुए लोगो की जरुरत है। चलिए दोस्तों, इस विषय पर कुछ और गंभीर बाते करते है। हालाँकि हम किसी पीड़िता का दर्द तो कम नहीं कर सकते, लेकिन उस दर्द के खिलाफ आवाज जरूर उठा सकते है और इस गंभीर विषय पर पुरुषों की मानसिक सोच को कुछ हद तक बदलने का प्रयास जरूर कर सकते है। ये ब्लॉग पोस्ट जितनी ज्यादा लोगो तक पहुचेंगी उतना ही इसका असर होगा। सौ में से अगर सिर्फ पांच लोग भी इस पोस्ट को देखकर सोच में पड़ जाए तो भी हम अपने प्रयास को सफल मानेंगे।
दोस्तों हम आप सभी से एक सवाल पूछना चाहते है - क्या सच में 100 रुपये में खरीदी जा सकती है एक इंसान की पूरी ज़िंदगी ? क्या ₹100 में किसी इंसान का चेहरा हमेशा के लिए मिटाया जा सकता है ? आपने हज़ारों चेहरे देखे होंगे। कोई हँसता होगा, कोई रोता होगा। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा चेहरा देखा है जो पिघल रहा हो? असल में पिघल रहा हो?
इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपसे एसिड अटैक के बारे में बात नहीं करेंगे, बल्कि हम आपको उस मौन यातना के अंदर ले जायेगे, जिसके बारे में हम बात करने से डरते हैं। ये 15 मिनट आपकी सोच को हमेशा के लिए बदल सकते हैं। क्या आप तैयार है - तो चलिए शरू करते है :
अध्याय 1: एसिड हमला सिर्फ एक अपराध नहीं, मानसिक बीमारी है।
दोस्तों, एसिड हमला कोई आवेश में किया गया छोटा झगड़ा नहीं है। यह पूर्व-योजित, सुविचारित, और पूरी ज़िंदगी मिटा देने वाला कायराना हमला होता है । आंकड़े बताते हैं कि 70% से अधिक पीड़ित महिलाएं हैं। क्यों? क्योंकि उन्होंने किसी पुरुष या लड़के का प्रपोज़ल ठुकरा दिया, शादी से इनकार कर दिया, ज़मीन का बंटवारा ठीक नहीं किया, या बस... किसी गलत इंसान की नज़र में खूबसूरत थीं।
कल्पना कीजिए: एक स्कूल जाने वाली लड़की। उसने किसी से कुछ नहीं कहा। एक दिन बाइक पर आए दो लोग उसके चेहरे पर तेजाब फेंक कर निकल जाते हैं। उस लड़की की गलती क्या रही होगी ? उसकी गलती सिर्फ इतनी थी की उसने किसी लड़के को दोस्ती करने से इनकार कर दिया। एसिड फेक कर किसी के चेहरे को विकृत कर देना ये सिर्फ अपराध नहीं है। ये उस महिला के अस्तित्व पर ही हमला है। ये हमला ये जताने का तरीका है की — अगर तुम मेरी नहीं हो सकती, तो तुम किसी और के लिए भी खूबसूरत नहीं रह सकती।
अध्याय 2: शरीर का अंतिम संस्कार।
दोस्तों, जिस पल एसिड त्वचा को छूता है, वो पल जीवन का आखिरी सामान्य पल होता है। सल्फ्यूरिक या नाइट्रिक एसिड तुरंत प्रोटीन को डीनेचर करना शुरू कर देता है। मतलब? आपकी त्वचा पिघलने लगती है। वसा की परत, मांसपेशियाँ, कभी-कभी हड्डी तक दिखने लगती है। कुछ ही सेकंड में आँखों में स्थायी अंधापन छा जाता है । कान, नाक, होंठ — सब कुछ आकार खो देते है। लेकिन सबसे बुरा दर्द शारीरिक नहीं होता। ये होता है मानसिक दर्द, मानसिक पीड़ा। ये, वो दर्द होता है — जब पीड़ित अपना चेहरा आईने में देखती है तो उसे अपना ही जाना पहचाना चेहरा नहीं दिखता बल्कि उसे दिखता है एक अजनबी चेहरा । क्या कोई पुरुष ऐसे मानसिक दर्द को महसूस कर पायेगा ?
हमें पता है, इस तरह की पोस्ट्स में या ऐसी बातों में आप को बहोत ज्यादा दिलचस्पी नहीं होगी, क्योंकि हमने पहले ही कहा था इस सच को जानने और सुनने के लिए हिम्मत चाहिए। लेकिन अगर आप में वो हिम्मत है तो चलिए उस दर्द को और गहराई से महसूस करने की कोशिश करते है। दोस्तों, पोस्ट लम्बी हो सकती है, क्योंकि कुछ दर्द, पीड़ा को शॉर्ट्स या रील बनाकर पेश नहीं किया जा सकता। आपका कीमती समय भी उसी दर्द को समझने की कीमत समझीये।
आईये दोस्तों अब बात करते है,
Chapter 3: दर्द सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं है — असली पीड़ा बाद में शुरू होती है।
मान लीजिए, पीड़ित बच गई। सर्जरी हुई। स्किन ग्राफ्टिंग हुई। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एसिड अटैक सर्वाइवर को औसतन 10 से 15 सर्जरी से गुजरना पड़ता है? कई बार तो 30 से अधिक। क्या इतने दर्द को सहने की सहनशीलता उन पुरुषों को कभी होगी जिन्होंने एसिड अटैक जैसा अमानवीय, घिनौना कृत्य किया है ? यही तकलीफ अगर उस अपराधी को दी जाये फिर सोचिये उस पर क्या बीतेगी। हर सर्जरी से महीनों का दर्द। हर दिन दर्पण में खुद की ही एक नई मौत ।
है न दोस्तों ये डरावना ? अब ये आपको पक्का डरावना लग रहा होगा, क्योंकि ये सब अब आप के साथ भी हो रहा है। हालाँकि अभी आप के साथ ये कल्पना में हो रहा है। जब कल्पना ही इतनी क्रूर और विभित्स लग रही है, तो सच कितना भयावह होगा आप सोच ही सकते है । लगता है अब आप को समझ आ रहा होगा की एसिड अटैक का दर्द क्या होता है ? लेकिन घबराइए मत, अभी तो आप इस क्रूरता के सिर्फ शुरवाती चरण में है। हमारे साथ बने रहिये दोस्तों, पुरुषों के द्वारा की गयी क्रूरता के समुन्दर में अभी और गोते लगाने बाकी है।
Chapter 4: क्या आपने कभी किसी एसिड सर्वाइवर से बात की।
हमें नहीं लगता की आप ने कभी किसी एसिड सर्वाइवर से बात की होगी। हमारा दावा है की इस वीडियो को देखने वाले कम से कम 95% लोगो ने अपनी पूरी जिंदगी में कभी किसी एसिड सर्वाइवर से बात नहीं की होगी। क्योंकि किसी को कभी जरुरत ही नहीं पड़ी।
आईये हमारे कहानी के किसी काल्पनिक पात्र से इस क्रूरता का जिवंत चित्रण समझने की कोशिश करते है
मेरा नाम x y z है। मेरे साथ एसिड हमला लगभग 5 साल पहले हुआ था जब मैं कॉलेज जाती थी। उस दिन मैं बस स्टॉप पर खड़ी थी। अचानक कुछ गर्म, जलता हुआ मेरे बाएँ गाल पर गिरा। मुझे लगा कोई गर्म चाय गिरा दी। लेकिन फिर दूसरा छींटा और तीसरा। मैं चिल्लाई। लोग दौड़े आए, लेकिन किसी ने पानी नहीं डाला। सब देखते रहे। अस्पताल में मैंने 6 महीने बिताए। मेरे पिता ने अपनी ज़मीन बेच दी। मेरी माँ रात-रात भर रोती रही। सबसे बुरा दिन वो था जब मेरे जान पहचान, रिश्तेदारों, दोस्तों ने मुझसे कहा — ' तुम अब पहले जैसी नहीं रही।' मैं जवाब नहीं दे पाई। लेकिन मैं अब भी रोज़ सुबह आईने से डरती हूँ। लेकिन मैंने तय किया है — मैं डरूंगी ज़रूर, लेकिन मरूंगी नहीं।
दोस्तों आपने पोस्ट को यहाँ तक पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद। आप से यही उम्मीद थी। हमने सिर्फ किसी काल्पनिक घटना के जरिये आपको ये बताना चाहा है की वास्तविकता कैसी होती होगी। ताकि आप ऐसा कुछ करने से पहले हजार बार सोचे।
आईये अब जानते है की इसका निष्कर्ष क्या है ?
Chapter 5 : अब तुम क्या करोगे?
हर साल, दुनिया में हजारों एसिड हमले होते हैं। भारत में अकेले 200 से 300 मामले रिपोर्ट होते हैं। कितने अन-रिपोर्टेड होते है ? शायद दोगुने। लेकिन ये सिर्फ संख्या नहीं है। हर नंबर के पीछे एक इंसान है — जो सपने देखता था, हंसता था, रोता था, प्यार करता था। हालाँकि इस के लिए कानून बने हैं। सज़ा भी सख्त हुई है। एसिड की बिक्री पर नियंत्रण भी हुआ है। लेकिन क्या उत्पीड़क रुके हैं? क्या हमले रुके है ? नहीं, बिलकुल भी नहीं ? देश में अब भी इस आधुनिक युग में महिलाओं पर एसिड हमले हो रहे है ? और ये हमले रुकेंगे नहीं क्योंकि समाज की पुरुषतांत्रिक मानसिकता अभी भी कहती है — 'औरत को सबक सिखाना ज़रूरी है।'
आप इस ब्लॉग पोस्ट को पढ़ रहे हैं। तो हम आप से जानना चाहेंगे की अब आप क्या करोंगे ? दोस्तों, आप दो ही चीजे कर सकते है - आप या तो पढ़ना बंद कर देंगे, या कुछ बदलेंगे। पोस्ट को बंद करते है, तो फिर आपने पोस्ट को पढ़ने में समय ख़राब कर दिया है और खुद को उसी एसिड हमलावर की श्रेणी में ला कर खड़ा कर दिया है। क्योंकि जो व्यक्ती किसी अपराध को मूक होकर देखता रहे और अपनी जिम्मेदारी से भाग जाये वो भी किसी अपराधी से कम नहीं होता। आप पोस्ट को स्किप करना चाहते है इसका मतलब ही है की आप उस हमलावर की तरफदारी कर रहे हो तभी सच्चाई को स्वीकार किये बिना आप भाग रहे है।
दोस्तों, अगर आप सच में कुछ बदलाव चाहते है तो बदलाव बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। बस थोडी सी जागरूकता की जरुरत है। आपकी जागरूकता, सतर्कता किसी निर्दोष की जिंदगी बचाने में सहायक हो सकती है। जैसे, अगर आप कहीं गैर तरीके से एसिड बिकता देखें जो आपको संदेहास्पद लगे तो बिना डरे, बिना झिझक के पूछे और हो सके तो पुलिस में रिपोर्ट करें। अगर कोई महिला आपको बताए कि उसे धमकी मिल रही है तो उसके साथ परिवार के सदस्य के तौर पर खड़े हों। अगर किसी सर्वाइवर को देखें तो उसके साथ मानवीयता के साथ बर्ताव करे। उसकी हो सके उतनी तुरंत मदद करें। किसी भी पीड़िता को घूरें नहीं, उसने कोई गुनाह नहीं किया है। हो सके तो उसे पानी दें, अस्पताल ले जाएँ, या बस इतना कहें — 'तुम अकेली नहीं हो। और हाँ — अपने बेटों को सिखाएँ कि 'नहीं' का मतलब 'नहीं' होता है। अपनी बेटियों को सिखाएँ कि वे चुप न रहें।
हमारी पोस्ट हो सकता हैं बहुतो को पसंद ना आये। ना ही इस पोस्ट को देखने के बाद कोई बहुत बड़ा परिवर्तन भी देश में आने वाला हैं। क्योकि परिवर्तन किसी दूसरे के द्वारा कभी नहीं आता। उसे लाने के लिए खुद परिवर्तित होना पड़ता हैं। ये वीडियो उसी परिवर्तन के प्रति एक छोटा सा प्रयास हैं। अगर आप सच में इससे प्रेरित हुए हैं तो इसे अपने दोस्तों के साथ तथा परिवार के साथ सामाजिक स्तर पर शेयर करे। अगर आपको लगता है कि ये ब्लॉग पोस्ट किसी तक पहुँचना चाहिए तो बेझिझक शेयर करें। हो सकता है कोई अकेला इंसान ये देखकर हिम्मत जुटा ले। क्योंकि तेजाब से चेहरा जल सकता है, लेकिन इंसान की आत्मा नहीं।
आप हमसे जुड़ कर हमें प्रेरित करे ताकि हम खुद में परिवर्तन के स्तर को और ऊँचाई तक ले जा सके। हो सकता हो हमारा यही परिवर्तन किसी दिन आप के काम आ जाये। आप अपने विचारो को बेझिझक हमारे कमैंट्स बॉक्स में लिख सकते हैं। आप के सूचनाओं से हमें ये महसूस होगा की आप निश्चित तौर पर इसके ख़िलाफ़ हैं और एक बेहतरीन परिवर्तन लाना चाहते हैं। वीडियो को पूरा देखने के लिए आपका धन्यवाद। आपके मंगल और मृदुल जीवन के लिए सदैव शुभकामनाओं के साथ।
अंत में हम अलविदा नहीं कहेगे बल्कि कहेगे — जागते रहो, सतर्क रहो ।

aapke iss pramanik prayatna me hum sada apke saath hai.....
ReplyDeleteThanks for your comments. It is appreciated that you are with us.
DeleteVolcanic subject to be discussed,
ReplyDeleteNeed to give solutions...
We are agree with your reply. LIFOMETRY encourage to discuss this subject in mass.
DeleteVery sensitive issue. Needs more awareness. Thanks for sharing. And keep writing 👍🏻
ReplyDeleteThank you very much Sonaliji. We very much aware that this is social and sensitive issue. We condemn such incidents faced by females. We appreciating that as a female, you understand this issue and replied. Keep connected with us. Best Regards from LIFOMETRY.
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