जीना नहीं आता तो जिंदगी क्या ख़ाक जी है



शाम के धुंदले रोशनी में, कही दूर घर लौटने की ख़ुशी में परिंदो के घोंसलों में कुछ मस्तियाँ शुरू थी। मै बहोत देर तक उनकी उस मस्ती भरे खेल को देखता रहता हु। उनको देखकर लगता है, मै भी उनके जैसे पंख फैलाकर दूर कही उड़ जाऊ। परिंदो के लिए उड़ना शायद छोटी बात हो, लेकिन इंसानो के लिए इसके कई मतलब निकलते है। शाम का अँधेरा और भी गहरा होते जाता है।  अब तो परिंदो के पंखो की फड़फड़ाहट भी खामोश हो गयी है, मानो शाम के अँधेरे ने उस मस्ती भरी आवाज़ को पी लिया हो। अब तो ये परिंदे भी उसी शाम के अँधेरे का हिस्सा हो गए है मै अक्सर हर शाम को परिदो को देखकर सोचता हु की ये उनके साथियो के मिलने की ख़ुशी है या कल बिछड़ जाने का विरह गीत। मै हमेशा परिंदो के चेहरे को पहचानने की कोशिश करता रहता हु, पर मै कभी भी उनके चेहरों को पहचान ही नहीं पाया। इंसानों को भी कहा पहचान पाया मै ?  क्या परिंदे भी अपने जिंदगी का हिसाब रखते होंगे इंसानों जैसे ? क्या वो भी हमारे जैसे अपने यादों को संजोकर रखते होंगे ? क्या वो भी इंसानो जैसे अपने बचपन, जवानी और बुढ़ापे को याद करते होंगे ? 


हो सकता हो, उनकी जिंदगी हमारी जैसे ना होती हो । लेकिन हम भी कहाँ उनके जैसे जीने की कोशिश करते है ! बढ़ती उम्र के साथ साथ हमारे सारे सवाल एक ही जगह पर आकर रुक जाते है......... जीवन की शाम पर, उस शाम के डरावने अँधेरे पर ! चमक भरी जिंदगी का सूरज हमारे आँखों के सामने अँधेरे में डूबता हुआ दिखाई देता है और हम अपाहिज की तरह ख़ामोशी से उसे देखने के सिवा कुछ भी कर नहीं पाते। सिर्फ अपने जिंदगी के गणित का हिसाब लगाने के सिवा, जिसका हल सारी उम्र भर की कोशिशों के बावजूद भी नहीं निकला, क्योकि जिंदगी का सारा गणित हमेशा ठीक ही होगा ये जरुरी भी तो नहीं। हालाँकि जीवन का गणित ठीक हो या गलत ये मायने नहीं रखता। जीवन का गणित तो बस एक ही बात पर हल होता है और वो है क्या हमने उसे हल करने की कोशिश भी कभी की है? हम हमेशा अपने जिंदगी के हिसाब किसी दूसरे के हाथ में देकर अपना जीवन खाली रखते है।  ऐसे खाली जीवन का सच में क्या गणित किया जा सकता है ? दुनिया में अगर सभी चीज़ो की कीमत है तो जीवन की भी होनी चाहिए। लेकिन हम पाप -पुण्य, सुख -दुःख, राग -लोभ  इन बेतुके कल्पनाओंसे भरे बातों का गणित करते रहते है। इस दुनिया में हम सभी अपने तरीके से जीने के हक़दार है, बंधनो का जाल तो उन कायरो के लिए है जो जीने के गणित को हल करना ही नहीं चाहते। कुछ ही तो पल मिलते है हमें पूरी जिंदगी में जो हर किसी के लिए खास होते है, उन ख़ास पलों को भी जीना नहीं आता तो पूरी जिंदगी क्या ख़ाक जी है। केवल सरफिरे ही जीवन के गणित को समज़ते है क्योकि वही आम व्यक्ति की काल्पनिक क्षमताओं के बाहर जा कर जीवन को जीते है और असाधारण जीवन जीने का प्रण लेते है। सरफिरे वही होते है जो अपने आप को आम होने से मना कर देते है। 


सभी को अपने जीवन के हर रंग को इसी जीवन में सब के साथ बिखेरकर विदा होना है, परिंदो जैसे।ये हर परिंदो पर निर्भर करता है की परिंदे का जीवन कितने रंगो की गहराई से भरा है। हो सकता हो की परिदों को गणित की भाषा न आती हो, पर वे इस बात का गणित जानते है की किस दसा, किस अवस्था या हालत में अपने जीवन को कैसे जीना है। वास्तव में परिंदे जानते है के वे पहले भी कुछ नहीं थे और मरने के बाद भी कुछ नहीं है। लेकिन सिर्फ हमें छोड़कर दुनिका का हर जीव ये सोचता है और सिर्फ जीवित प्राणी ही नहीं घास का तिनका भी ये सोचता है। रोज हम अपने किसी को इस दुनिया से बिदा होते हुए देखते है, ऐसे ही एक दिन ख़ुद को भी जाना है। शरीर के नष्ट होने के बाद जो 'अवशेष' रहता है वह हम नहीं है। हम पूरी जिंदगी बने बनाये रास्तो पर चलते रहते है। कभी हमने आकाश में उड़ना सीखा ही नहीं। हम खुले आकाश में परिंदो जैसे उड़ने से डरते है क्योकि आकाश पर पदचिन्ह नहीं बनते।  हम आकाश में उड़ने की हिम्मत जुटाने में हमेशा नाकाम रहे है क्योकि की हमने  ख़ुद के जीवन  के पंख काँट डाले है।   


दोस्तों ये पोस्ट आप मेरे सभी के जीवन की अनकही हक़ीक़त है, मैंने इसे बस अपने शब्दों में पिरोने की कोशिश की है।  उम्मीद है आप अपने जीवन से हताश नहीं हुए है और हताश होने का कोई मतलब भी नहीं है। आशा करता हु आप मेरे इस कोशिश को अपने दोस्तों - परिवार से जरुर सांझा करेंगे ताकि वो भी उत्साहपूर्ण जीवन को जीने का प्रयास करेंगे। हम सभी सूरज की रौशनी पैदा नहीं कर सकते लेकिन अपने हिस्से की रौशनी से दूसरे का अंधेरा जरूर मिटा सकते है। ये पोस्ट किसी का अँधेरा मिटाने कि और बढ़ाया गया एक कदम है। एक कदम की पहल आप सभी से अनुगृहीत है। आपके बहुमूल्य जीवन के कीमती समय के लिए आप सभी का धन्यवाद।   




1 comment:

  1. Saara manushya ka jeevan Mulyon ke aadhar par hee chalta hain, phir woh arth sanjone ki ho ya vyaktitva.

    ReplyDelete

IFRAME SYNC